डायबिटीज़ और रेटिना

भारत में डायबिटीज़ तेजी से बढ़ती हुई स्वास्थ्य समस्या है। लोग इसके प्रभाव दिल, किडनी और नर्व्स पर तो समझते हैं, लेकिन इसका सबसे खतरनाक असर रेटिना पर होने वाली क्षति को अक्सर नजरअंदाज़ कर देते हैं। एक रेटिना विशेषज्ञ के रूप में, मैं रोज़ ऐसे कई मरीज देखता हूँ जिनकी दृष्टि इसीलिए खराब हुई क्योंकि उन्होंने समय पर अपनी आँखों की जाँच नहीं कराई। इस ब्लॉग में समझते हैं कि डायबिटीज़ में नियमित रेटिना परीक्षण क्यों ज़रूरी है।

डायबिटीज़ रेटिना को कैसे नुकसान पहुँचाती है?

रेटिना आँख के पीछे स्थित एक संवेदनशील परत है, जो प्रकाश को ग्रहण करती है और देखने की क्षमता देती है। जब ब्लड शुगर बढ़ी हुई रहती है, तो यह रेटिना की छोटी-छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुँचाना शुरू करती है। यही अवस्था डायबिटिक रेटिनोपैथी कहलाती है।

यह बीमारी कई चरणों में प्रगति करती है:

  1. माइल्ड व मॉडरेट एनपीडीआर:
    छोटी रक्त वाहिकाओं में क्षति शुरू होती है, अधिकतर बिना किसी लक्षण के।
  2. सीवियर एनपीडीआर:
    कई रक्त वाहिकाएँ बंद होने लगती हैं, जिससे रेटिना को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती।
  3. पीडीआर (प्रोलिफेरेटिव डायबिटिक रेटिनोपैथी):
    आँख में नई, कमजोर रक्त वाहिकाएँ बनने लगती हैं जो अचानक खून बहने का कारण बन सकती हैं।
  4. डायबिटिक मैक्यूलर एडीमा (DME):
    रेटिना का केंद्रीय हिस्सा सूज जाता है, जिससे धुंधला या विकृत दिखने लगता है।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि शुरुआती चरणों में कोई दर्द या स्पष्ट लक्षण नहीं होते। जब तक मरीज को महसूस होता है, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है।

नियमित आँखों की जाँच क्यों आवश्यक है?

डायबिटीज़ में दृष्टि को सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी तरीका है सम्पूर्ण रेटिना परीक्षण, जिसमें शामिल हैं:

  • डाइलेटेड फंडस एग्ज़ामिनेशन
  • ओसीटी (OCT) स्कैन
  • फंडस फ़ोटोग्राफ़ी
  • फ्लोरोसिन एंजियोग्राफी (ज़रूरत पड़ने पर)

ये जाँचें शुरुआती परिवर्तन पकड़ लेती हैं, जब कोई लक्षण भी नहीं होता।

समय पर पहचान = सही इलाज = दृष्टि सुरक्षित

उपचार के आधुनिक विकल्पों में शामिल हैं:

  • रेटिना लेज़र
  • एंटी-VEGF इंजेक्शन
  • विट्रेक्टॉमी (उन्नत मामलों में)
  • रक्त शर्करा का बेहतर नियंत्रण

किसे और कब रेटिना जाँच करानी चाहिए?

  • टाइप 1 डायबिटीज़:
    डायग्नोसिस के 5 साल के भीतर पहली जाँच।
  • टाइप 2 डायबिटीज़:
    डायग्नोसिस के समय ही आँखों की जाँच—क्योंकि अक्सर डायबिटीज़ कई साल पुरानी होती है।
  • सभी डायबिटिक मरीज:
    हर वर्ष एक बार रेटिना जाँच अनिवार्य।
    यदि रेटिनोपैथी मिले तो जाँच की आवृत्ति बढ़ सकती है।

समय रहते कदम उठाएँ, दृष्टि बचाएँ

डायबिटिक रेटिनोपैथी भारत में अंधेपन के प्रमुख कारणों में से एक है, लेकिन खुशखबरी यह है कि 90% मामलों में दृष्टि बचाई जा सकती है, यदि बीमारी समय पर पकड़ी जाए।

Sharnam Eye Centre & Laser Services, Ghaziabad में हम उन्नत तकनीक, OCT, लेज़र और आधुनिक उपचार से डायबिटिक आँख रोगों का सटीक निदान और उपचार करते हैं।

यदि आपको या आपके किसी करीबी को डायबिटीज़ है, तो लक्षणों का इंतज़ार न करें। साल में एक बार रेटिना टेस्ट आपकी दृष्टि बचाने का सबसे आसान तरीका है।

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